Dec 14, 2017 - Jaun Elia    No Comments

जौन एलिया कभी भी किसी साहित्यिक गिरोह का हिस्सा नहीं थे – वह एक स्वतंत्र आत्मा थे, उनकी एक स्वतंत्र विचारधारा थी

जौन एलिया उत्तर प्रदेश में जन्मे एक ऐसे कवि है जो इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सुने और पढ़े जाते है ! भारत-पाक विभाजन के दौरान जौन एलिया पाकिस्तान के निवासी हो गए थे मगर हिन्दुस्तान से उनका और हिन्दुस्तानियों का उनसे प्यार कम नहीं हुआ ! उनकी कविताएं उनके क्रांतिकारी विचारों को प्रतिबिंबित करती हैं ! जॉन एलिया का जन्म 14 दिसंबर 1931 को अमरोहा, उत्तर प्रदेश में हुआ। यह अब के शायरों में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले शायरों में शुमार हैं। शायद, यानी,गुमान इनके प्रमुख संग्रह हैं इनकी मृत्यु 8 नवंबर 2004 में हुई। जौन सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं हिंदुस्तान व पूरे विश्व में अदब के साथ पढ़े और जाने जाते हैं।

जौन एलिया युवाओं के लिए भी एक और उद्देश्य की सेवा कर रहे हैं! उनकी कविता और उनके लिखने की स्वतंत्रता युवाओ को सोचने और लिखने पर विवस करती है, आज जब लिखने और बोलने के पहले सोचना पड़ता है, सोच एक कमरे तक सीमित रह गयी है ऐसी परिस्थिति में जौन एलिया की लेखनी युवाओ में प्रेरणा का काम करती है ! जौन एलिया ने कभी भी अपनी मनोदशा को नियंत्रित नहीं किया एक खुली विचारधारा के साथ उस समय लिखा जब भारत-पाक विवाद चरम सीमा पर था !
आज, हर ‘सफल’ व्यक्ति समृद्ध है, सफल कवि अमीर हैं, सफल गायक/ गायिका समृद्ध हैं, हर सफल पत्रकार समृद्ध हैं। मगर जौन एलिया शायद इस पैटर्न से बहुत दूर थे, उनके पदचिन्ह अलग थे ! आज के नए कवि उसी पैटर्न में दिख रहे है, उनकी अपनी शैली है उनके अपने विचार है अपनी विचारधारा है!
आज कविशाला भी एक ऐसी ही विचारधारा के लिए काम कर रहा है, जो कभी भी कवियों को वाधित नहीं करती किसी विशेष धारा को फॉलो करने के लिए, हर एक कवि स्वतन्त्र है अपने विचारो को अपनी धारा और लय में लिखने के लिए ! कोई भी धारा या विचारधारा किसी इंसान के द्वारा ही निजात की गयी है ! हो सकता है आज के युवा एक नयी विधा निजात कर ले, साहित्य और कविता में स्वतंत्रता ही किसी नए अविष्कार में सहायक होती है !
अभी हाल ही में जो प्यार, जौन एलिया को युवाओ से मिला है उससे यही प्रतीत होता है की शायद हमें जौन कुछ बताना चाहते है वो चाहते है हम अपनी कलम को समझे और उसका उपयोग करे! वो खुद कहते हैं:
हार आयी है कोई आस मशीन, शाम से है बहुत उदास मशीन 
ये रिश्तो का कारखाना है, एक मशीन और उसके पास मशीन 
एक पुर्ज़ा था वो भी टूट गया, अब रखा क्या है तेरे पास मशीन    
आज जौन एलिया की लोकप्रियता बढ़ रही है, उनकी कुछ प्रसिद्ध पंक्तियाँ जो उनके जीवन और उनकी पारखी नजर को दर्शाती है :
——
मैं जो हूँ ‘जौन-एलिया’ हूँ जनाब
इस का बेहद लिहाज़ कीजिएगा
——
अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर
कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
 
——
अब कि जब जानाना तुम को है सभी पर ए’तिबार
अब तुम्हें जानाना मुझ पर ए’तिबार आया तो क्या
——
अब तो उस के बारे में तुम जो चाहो वो कह डालो
वो अंगड़ाई मेरे कमरे तक तो बड़ी रूहानी थी
——
अपने सभी गिले बजा पर है यही कि दिलरुब
मेरा तिरा मोआ’मला इश्क़ के बस का था नहीं
 
 
जौन एलिया कभी भी किसी भी साहित्यिक गिरोह का हिस्सा नहीं थे! वह एक स्वतंत्र आत्मा थे एक स्वतंत्र विचारधारा थी !
Dec 2, 2017 - Ankur Mishra, Journalism    No Comments

Team Gaonconnection – Happy Birthday ( सफर आसान नहीं है मगर अद्वितीय और सराहनीय है )

गाँव को हमेशा से वो सुविधायें नहीं मिली जो की सरकारो ने वादे किये और चुनाव के बाद भूल गए ! उनकी समस्याये कभी भी देश के ऊपरी हिस्सों को दिखाई नहीं दी या सुनाई नहीं दी! भारत की अधिकतर आबादी देश के गाँव में ही रहती है, उसी बाहुल्य का यह हाल है! यह आबादी कभी कभी अखबारों में आ जाती है, कभी कभी टी.वी. में आ जाती है परन्तु अधिकतर सबसे इन सबसे दूर होती है !
क्यों?
1990 में मेरा जन्म हमीरपुर जिले के एक ऐसे गाँव में हुआ जहाँ पर अभी भी इलेक्ट्रिसिटी नहीं है, जहाँ पर स्कूल या अस्पताल नहीं है ( जिटकारी, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश )! मगर किसी को नहीं पता, ऐसे हजारो गाँव होंगे जहाँ पर बहुत समस्याएं है मगर उनकी खबर विकसित लोगो तक कैसे पहुंचे? यह हमेशा से बड़ी समस्या है !
मैंने अपनी पढ़ाई सुमेरपुर (हमीरपुर, उत्तर प्रदेश) के स्कूल में की जहाँ छटवीं कक्षा में पहली बार अंग्रेजी पड़ी! क्या यह शिक्षा में दोलुभापन नहीं है, मगर इसका निराकरण कैसे निकले?
गांव के किसान की कहानी से लेकर, कुम्हार के घड़े तक की कहानी लोगो तक पहुचनी चाहिए!
हम किसी किसी किसान को तभी क्यों जानते है जब उसका लड़का या लड़की गांव से निकलकर आसमान में उड़ते है !
देश को सबसे जरूरी चीज, अन्न देने वाले किसानो को कभी कोइ एवार्ड क्यों नहीं मिलता?
… लिस्ट लम्बी लिस्ट है जो गांव से बहार निकलकर लोगो तक पहुचनी चाहिए !
मिडिया इतनी ज्यादा केंद्र सेंट्रिक हो चुकी है की गांव या कस्बो की खबरे ऊँचे तबके के लोगो तक पहुंच नहीं पाती !
ऐसे में जो काम नीलेश मिसरा द्वारा शुरू किये गए गांव कनेक्शन ने किया है वो काम वास्तव में सराहनीय है, खबर चाहे गोरखपुर में जान गवां चुके बच्चो की हो या फिर, किसानो की जान की कहानी! सबसे अच्छा काम जो गांव कनेक्शन कर रहा है वो है उन खबरों को बाहर लाना जो बड़ी खबरों के नीचे दब सी गयी थी !
खेत में काम कर रहे किसान की कहानी नेताओ तक कैसे पहुचानी है या फिर गांव में प्रताड़ित महिला की खबर समाज के सामने कैसे लेकर आनी है !
हजारो लोग जो गाँव में रोजाना भूखे सोते है, हजारो लड़कियाँ जो गर्भ में ही मार दी जाती है, हजारो किसान जो कर्ज में डूबे हुए है, गांव में शिक्षा की क्या हालत है, गांव में अस्पताल की क्या हालत है, पानी की क्या समस्या है, इलेक्ट्रिसिटी की क्या समस्या है …. ऐसे हजारो महत्वपूर्ण बिंदुओं में बात करके गाँव कनेक्शन ने ईमानदार पत्रिकारिता की मिशाल कायम की है !
सफर आसान नहीं है मगर अद्वितीय और सराहनीय है !
पांच साल के इस सफर के लिए गाँव  कनेक्शन की पूरी टीम को शुभकामनाये!
ईमानदार पत्रकारिता की इस ईमारत में मंजिले जोड़ते रहिये !
Nov 23, 2017 - Ankur Mishra, Pollution    No Comments

हमारा यह सफर जारी रहा तो जल्द ही हम प्रदूषण में विश्व विजयी हो जायेगे

पर्यावरण प्रदूषण अपने चरम पर है, मगर लोगो की जिंदगी इतनी तेज रफ़्तार से बढ़ रही है की किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है ! प्रकृति रोजाना चेतावनी देती है, कभी हवा के जरिये, तो कभी आसमान के जरिये, कभी जमीन के जरिये तो कभी पानी के जरिये, मगर दो-चार दिन की तक सोशल मीडिया में बात करके या फिर शांति से घर के अंदर रहके सब कुछ भूल जाते है ! लोग बिना गाड़ियों के चल नहीं सकते, बिना इलेक्ट्रिसिटी के रह नहीं सकते, बिना हवा के साँस नहीं ले सकते, बिना पानी के जीवन नहीं है ….

फिर भी इन सब चीजों को इंसान खुद ही ख़त्म करने में तुला है ! सैकड़ो पेड़ काट तो सकता है मगर रोजाना एक पेड़ लगा नहीं सकता, रोजाना न जरूरत होते हुए भी सैकड़ो लीटर पानी बर्बाद कर देता है, हर त्यौहार में हजारोके पढाके जला देता है…..

आखिर क्यों ?

क्या इंसान की खुद की जिंदगी उसकी नहीं है, जिसकी वजह से उसको इसकी कोई भी परवाह नहीं है ! अनेक प्रकार के प्रदूषण के चलते रोजाना सैकड़ो लोग अपनी जान गवाते है, बीमार पड़ते है , अस्पताल जाते है…
फिर भी प्रकृति के लिए कुछ नहीं करते, उसके साथ खिलवाड़ करने के अलावा !
चीन अभी प्रदूषण के मामले में सबसे आगे है मगर अगर हमारा प्रकृति के लिए गन्दगी फ़ैलाने का यह सफर जारी रहा तो जल्द ही हम प्रदूषण में विश्व विजयी हो जायेगे ! कभी कभी लोग इस प्रदूषण की वजह भरी जनसख्या को मानते है, मगर क्या यह सच है? क्या बढ़ी हुयी जनसँख्या ही एक कारण है या इंसान का रहन सहन प्रमुख कारण है !
भारत की किसी सरकार ने पर्यावरण प्रदूषण को कभी भी प्रमुख मुद्दा क्यों नहीं बनाया?
क्या यह काले धन वापसी, जी एस टी, नोटबंदी या किसी भी दूसरे मुद्दे से छोटा मुद्दा है पर्यावरण प्रदूषण? 
भारत की सरकारों की ढीली नीतियाँ ही आज के प्रदूषण का प्रमुख कारण भी है, जिस तरह से सरकार रातो रात पूरे देश में पुराने नोट बंद कर सकती है या दूसरे और कानून जबरन लगा सकती है क्या उसी प्रकार सबसे सबसे बड़ी समस्या के लिए कानून नहीं बनाये जाने चाहिए?
समस्या बहुत बड़ी है, इतनी बड़ी है की मनीष मुंद्रा और संजय मिश्रा को ‘कड़वी हवा’ जैसी फिल्म से लोगो को जगरूप करना पड़ रहा है! 
देश के हर तब्के के लोगो को आगे आकर सोचना पड़ेगा, समस्या हर घर की सरकार द्वारा चलाये जा रहे हर नियम को जो पर्यावरण प्रदूषण को रोकने में सहायक हो उसका पालन करना पड़ेगा !
कुछ पंक्तियाँ है मेरी एक कविता की –
मानते है प्रगति पथ पर हम बहुत आगे बढे हो,
बदलो से और ऊपर चाँद-तारो पर चढ़े हो !
जलधि अम्बर एक करके स्वर्ग धरती पर बनाए,
और मरुस्थल पर भी तुमने मृदु अम्बु के अंचल बहाए!
ब्रह्म का नितशोध करके ब्रह्म ज्ञानी तुम कहाए,
मौत के मुख से भी जिंदगी तुम वापस ले आए !
चाहते क्या कोकिला भी गीत अब गए नही,
क्या मधुर पुष्पों के उपवन है तुम्हे भाए नही!
नाज से मुक्ति की ऐसी एक दुनिया बनाओ,
शान्ति हो सदभाव हो विध्वंश के सभ नाश हो!!
शुरुआत एक आम इंसान अपने घर से कर सकता है,
  1. अगर आप इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग नहीं कर रहे तो, पंखा , बल्ब बंद करके रखे! ऐसी चीजों का प्रयोग न कर करे जिसका एक बार प्रयोग करने के बाद फेकना पड़े!
  2. जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके पेड़ लगाए, एक पेड़ लगाने में आपको आधा घंटा से ज्यादा का वक्त नहीं लगेगा !
  3. सोलर एनर्जी का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करे !
  4. धूम्रपान न करे या काम करे !
  5. ऐसे वाहनों का प्रयोग करे जिनसे प्रदूषण काम हो या न हो
  6. ऐसे प्रोडक्ट्स प्रयोग करे जिनमे, प्लास्टिक और कागज फेकना न पड़े !
  7. पड़ाके न जलाये, खुशियां जाहिर करने के और भी रस्ते है !
…. और बहुत सी छोटी छोटी चीजे है जिनकी हम बचपन से पढ़ते आ रहे है ! बस जरूरत है अमल करने की !
Oct 4, 2017 - Ankur Mishra, INDIA, Politics    No Comments

Nothing is certain, neither life nor death – Indian Railways can prove anytime

The things which are happening in Indian Railways again proved: Life OR Death – Nothing is certain. We are the world’s fourth largest railway network into account. Yes, the Indian Railway Network indeed. So, step into the train and hand your life to the clemency of the dilapidated tracks, century-old bridges, miscued signaling system, slapdash maintenance and so on and so forth. Yes, still you must; because this is what 30 million Indians do on daily basis.
Indian Railways ran on average 13,313 passenger trains daily, If you suffer, don’t give a damn. It’s quite a normal phenomenon. Consider it a bonus if you manage to reach your destination unscathed. Always remember that normal things seldom happen in our country. It is abnormality which accounts for everything occurring out here.
Our railway system specializes in every possible way of mishap;
  • Bridge-collapses,
  • Malfunctioning signals,
  • Unclamped tracks,
  • Head-on collisions,
  • Infernos,

… blah, blah, blah. Does the count ever end?

Never. So better, let’s  leave it. Indian railway has only Corruption, cowardice, and crookedness, it has outshown almost every field when it comes to volume and traffic of scamps. We all know the fact, India is really a land of scampers, no doubt in that. It could have been somewhat relieving if this price that we pay would have been compensated by the losses we agonize due to them. But no, this has not yet been destined to us. Our Kings are busy at the moment solving out their own conflicts and convictions. Till then, we need to prepare ourselves, in case we are not, to witness some more like Sant Kabir Nagar Train Disaster, Kaifiyat Express Disaster, Kalinga Utkal Express derailed, Kuneru train derailment, Bhopal–Ujjain Passenger train bombing, Mumbai’s Elphinstone Road station, etc. Well, these many are enough to swap the population of a healthy Indian village by fouling corpses. The government terms them as tragedies and disasters, but they aren’t. Instead, they are massacres.

Take the example of Sant Kabir Nagar Train Accident-
Nearly 25 people died and 50 people were injured in the train accident where a Gorakhpur bound Gorakhdham Express hit a stationary goods train. The mishap took place near Khalilabad station in Sant Kabir Nagar district of Uttar Pradesh. The incident took place on May 26, 2014.

21 January 2017 – The Kuneru train derailment occurred when the 18448 Jagdalpur–Bhubaneswar Hirakhand Express derailed near Kuneru, Vizianagaram, killing 41 and injuring 68.
7 March 2017 – The 2017 Bhopal–Ujjain Passenger train bombing occurred when a bomb exploded on the Bhopal–Ujjain Passenger at Jabri railway station, injuring 10. This was the first strike in India by the Islamic State.[citation needed]
15 April 2017 – The Meerut–Lucknow Rajya Rani Express derailed 8 coaches near Rampur; injuring atleast 24.
19 August 2017 – The 18478 Puri–Haridwar Kalinga Utkal Express derailed in Khatauli, Muzaffarnagar, Uttar Pradesh. Killing at least 23 and leaving around 97 injured.
23 August 2017 – Auraiya train derailment occurred when the Kaifiyat Express (12225) derailed between Pata and Achalda railway stations around 02:40 am (IST). Around 100 people were injured.

Few major train accidents in India since 2014:
January 21, 2017: 29 people were killed and 50 others injured when the Jagdalpur-Bhubaneswar Hirakhand Express derailed in Andhra Pradesh’s Vizianagaram district.
December 28, 2016: Two passengers were killed and over 65 injured when 15 coaches of Sealdah-Ajmer Express derailed near Rura, 50 km from Kanpur in Uttar Pradesh.
November 20, 2016: 149 people were killed and over 300 injured when 14 coaches of Patna-Indore Express derailed near Pukhrayan station, close to Kanpur in Uttar Pradesh.
August 4, 2015: 25 people were killed and 25 others injured as Bogies of Mumbai-Varanasi Kamayani Express derailed and fell into Machak river in Harda district of Madhya Pradesh. Minutes later, the Janata Express also derailed at the same spot
March 20, 2015: 39 people were killed and 150 injured as Dehradun-Varanasi Janata Express derailed in Uttar Pradesh’s Rae Bareli.
May 4, 2014: 20 passengers died and 100 others were injured as Diva Junction-Sawantvadi passenger train derailed between Nagothane and Roha stations in Raigad district of Maharashtra.
May 26, 2014: 25 people were killed and over 50 others injured when Gorakhpur-bound Gorakhdham Express rammed into a stationary goods train near Khalilabad station in Sant Kabir Nagar district of Uttar Pradesh.

And the recent Mumbai’s Elphinstone Road station Disaster: More than 22 people were killed and 35 others were injured after a stampede broke out on a crowded pedestrian bridge connecting two stations in Mumbai, one of the worst tragedies to hit the city’s teeming local train network.

We can continue to talk about numerous such casualties. It does not seem to end; not unless the sleeping conscience of the constituent units of the system rises. But as is the current scene, it cannot be expected anytime soon in future. Even if it does, it rises only to attain quiescence again. Anyway, being common citizens, our job is to tolerate the tyrannies of the government that we have ourselves appointed. Isn’t it? What else can we do? We have given up the hope that the system would ever reconcile; then it would never rectify its fiddle.

After all, we become what we hope to be. We are common people because we consider ourselves to be, not because someone else has defined the term for us. We feel that we are pathetic, therefore comes the notion that we are common. Certainly, that is not the case. The feeling is just like the rotten-looking peel of a banana housing a healthy fruit inside. And, what to talk about the system we possess; it is just a lost balloon rising up in the air till it could fit upon the head of a pin. It really is easily manipulable and should be driven towards mass-benevolence rather than personal emancipation. Be a Gandhi, or be an Anna if time demands, but burn the midnight oil and turn the tables so that everyone goes home safe, no woman is widowed, no child is orphaned, no mother waits for her child and last but far from least, there is an overall headway standing as a testimony to the fact that the upcoming era is ours, the citizens’

Be a Mahatma Gandhi, or be an Anna Hazare if time demands, but burn the midnight oil and turn the tables so that everyone goes home safe, no woman is widowed, no child is orphaned, no mother waits for her child and last but far from least, there is an overall headway standing as a testimony to the fact that the upcoming era is ours, the citizens. This will be the real definition of ‘Achche Din’.

The gods of democracy – Cheers !!

अंधकार में विकास का प्रकाश खोजता उत्तर प्रदेश

जनसंख्या के परिदृश्य से देखा जाये तो उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा प्रदेश है, और अनेक विभाजनों के पश्चात भी क्षेत्रफल के परिदृश्य से चौथा स्थान उत्तर प्रदेश का ही है ! उत्तर प्रदेश में भारत का महान प्राचीन इतिहास हैं। भारी आबादी के अलावा, आपको महान भारतीय संस्कृति और विरासत यहीं मिलेगी! यदि आप पश्चिम उत्तर प्रदेश में जाते हैं तो आपको मुगलों की पुरानी विरासत मिलेगी। आगरा में स्थित ताजमहल दुनिया के सात चमत्कार में से एक है! देश के १४ में से ८ प्रधानमंत्री यही से हुए है और देश की अधिकतर चर्चित हस्तियां उत्तर प्रदेश से सम्बन्ध रखती है! देश के अधिकतर सर्वोच्च विश्वविद्यालय भी इसी उत्तर प्रदेश में आते है ! अधिकतर बड़े आईपीएस, आईएएस और सिविल सेवा अधिकारी उत्तर प्रदेश से भी आते हैं। इसके अलावा रानी लक्ष्मी बाई जो झांसी में जन्मी और स्वतंत्रता के लिए अंगेजो के खिलाफ लड़ी! मंगल पांडे ने आजादी के लिए पहली क्रांति शुरू की, बलिया में यहीं पैदा हुए थे! इन सब महान विरासतों और उपलब्धियों के बाद भी ऐसा क्या है जो आज का युवा उत्तर प्रदेश से बाहर जाने में मजबूर है!

क्या ८ प्रधानमंत्रियों वाला यह प्रदेश इतना भी विकसित नहीं हो पाया की वो इसी प्रदेश को युवाओ को सही शिक्षा दे सके?
सरकारी स्कूल की मर्मर दशा और प्राइवेट स्कूल की भरी भरकम फीस बच्चो का बचपन ख़राब करने का प्रमुख कारण है ! आकड़ो की देखे तो प्रदेश में करीब 1,69,857 सरकारी स्कूल है और करीब 2,43,014 कुल स्कूल है जो देश में सबसे बड़ा नंबर है, साथ ही करीब 10,09,333 अध्यापक पूरे प्रदेश में शिक्षा के लिए काम कर रहे है ! मगर क्या ये आकड़े सही है अगर इतना बड़ा नंबर प्रदेश में ईमानदारी से शिक्षा के लिए काम कर रहा है तो फिर प्रदेश की साक्षरता दर 57.18% क्यों है? ये वो नंबर है जो सरकारी आकड़ो से मिलते है! सरकारी नम्बरों भरोषा कर सकते है यह हम सभी जानते है!
प्रदेश में शिक्षा के लिए उच्च स्तरीय विश्वविद्यालय है, तकनीकी संस्थान है, मेडिकल कॉलेज है – फिर भी ऐसी क्या विवसता है की प्रदेश का युवा दूसरे प्रदेशो में शिक्षा के लिए भागता है! क्या उसे इन पर भरोषा नहीं है या फिर प्रदेश के सरकारी संस्थान ऐसी छवि समाज के सामने नहीं बना पाए जिसको देखकर युवाओ का मन उनमे पढ़ने का करे!
शिक्षा एक व्यक्ति के निर्माण का प्रधान अध्याय होता है, जिसका मजबूत होना सबसे जरूरी है! देश का सबसे बड़ी जनसंख्या वाला प्रदेश इसी प्रथम प्रधान अध्याय को मजबूत बनाने में असफल है !
जिम्मेदार कौन है, पता नहीं – सरकार, जनता या कोई और , ये बस सवाल है !

विश्व की सबसे बड़ी विरासत ‘ताजमहल’ रखने वाले प्रदेश में बेरोजगरी क्यों?
देश के बड़े उद्यमियों की लिस्ट में अनेक बड़े नाम उत्तर प्रदेश से आते है, मगर उन्होंने भी अपनी पहचान उत्तर प्रदेश से बाहर जाकर ही बनायी! 12वीं पंचवर्षीय योजना के बाद प्रदेश में १ करोंण से ज्यादा युवा बेरोजगार है, जो प्रदेश में रह रहा है! प्रदेश का अधिकतर युवा नौकरी के लिए दूसरे प्रदेशो में पड़ा हुआ है! किसान खेती करना बंद कर रहा है पिछले पाँच सालो में करीब ४९ लाख किसानो ने खेती करनी बंद कर दी है, यह प्रदेश में कृषि क्षेत्र के खराब प्रदर्शन को दर्शाता है, जो कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है! कारण सबको पता है – बीजों की बढ़ती रकम और किसानो को फसल का उचित रेट न मिलना! ऐसे में किसान लगातार खेती करना बंद कर रहा है और दूसरे रोजगार के माध्यम तलाश रहा है !
इन सबसे प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या रोजाना बढ़ रही है !
क्या किसी भी सरकार के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण नहीं रहा? प्रदेश में रोजगार पैदा करने के लिए सरकार कोई भी कार्य क्यों नहीं करती ! प्रदेश में नोएडा को छोड़ दे तो कोई भी बड़ी कंपनी नहीं मिलेगी! प्रदेश में कई जगह है जहाँ पर तकनीकी या प्रौद्योगिकी के कारखाने लगाए जा सकते है छोटी छोटी कंपनियों को अगर सरकार मौका दे तो वो काफी हद तक प्रदेश में रोजगार पैदा कर सकती है ! कौशल युक्त संसाधनों और शिक्षा का सरकार को खुद प्रमोसन हो सकता है ! तरीके उपलब्ध है सरकार को जागरूपता लाने और छोटे छोटे उद्यमियों की जो प्रदेश से बाह जाकर काम करते है, उनकी सहायता करने की जरूरत है !
मगर यह पहला कदम कौन उठाये, पता नहीं – सरकार, जनता या कोई और , ये बस सवाल है?

‘लक्ष्मीबाई और मंगल पांडे’ के प्रदेश की सुरक्षा में हाहाकार क्यों?
जिस प्रदेश में देश के अनेक क्रांतिकारियों ने जन्म लिया और देश की आजादी की लड़ाई लड़ी उसी प्रदेश में जनता हाहाकार कर रही है ! मजहबी दंगे हो या बलात्कार जनता कही सुरक्षित नहीं है, आकड़ो की माने तो करीब साढ़े तीन हजार बलात्कार और ६ हजार मर्डर केस पिछले साल दर्ज हुए है! कभी गाय के नाम पर तो कभी बीफ के नाम पर जनता रोजाना आपस में लड़ती रहती है!
उत्तर प्रदेश के लोग आम तौर पर बहुत ही धार्मिक, कड़ी मेहनत करते थे, लेकिन उपर्युक्त तत्वों ने उत्तर प्रदेश की छवि को खराब कर दी है।
समाधान साधारण है सही शिक्षा का लोगो तक पहुंचना, कानून के बारे में लोगों को शिक्षित करना, प्रभावी और कड़ी कानून व्यवस्था बनाना जो अपराधियों को तुरंत दंडित करने में मदद करे!

Ankur Mishra uttar Pradesh

अंधकार में विकास का प्रकाश खोजता उत्तर प्रदेश!
प्रदेश में कुछ गाँवो में आजतक अंधकार फैला हुआ है, मेरा ननिहाल उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में है जहाँ मेरा बचपन गुजरा वहाँ पर अब भी विद्युत नहीं पहुंच पायी! देश २१वी शदी की बात करता है और प्रदेश की जनता अंधकार में रहती है! राज्य में पिछले साल ही 6,832 मेगावाट बिजली की कमी देखि गयी है! समस्या का समाधान बिजली के नए संयंत्र है, मगर सरकार की मुख्य सूची से ये मुद्दा काफी दूर है !
सरकार को बिजली चोरी के लिए भी कड़े कदम उठाने होंगे!

स्वच्छ ‘उत्तर प्रदेश’ अभियान !
इलाहबाद, कानपुर, लखनऊ, आगरा इत्यादि विश्व के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में आते है! प्रदूषण नियंत्रण पर सरकार को कठिन नियम बनाने पड़ेगें!
‘ट्वायलेट एक प्रेम कथा’ उत्तर प्रदेश की एक सत्य व्यथा दिखती है, यहां अधिकांश जनसँख्या ग्रामीण है और सुबह सुबह अधिकांश लोग अभी भी खुला शौचालय करते हैं! लोगो में नैतिक मूल्यों का जगरूप करना जरूरी है !

समस्याएं बहुत है गिनती खत्म नहीं होगी, सरकार हर बार चुनावी मुद्दों की लिस्ट बनाती और कुछ समय बात सब भूल जाती है! जनता को रिपोर्ट कार्ड रखने की जरुरत है और समय समय पर अपडेट लेने की जरूरत है जिससे सरकार हमेशा जगरूप रहेगी ! साथ ही साथ जनता को अपने नैतिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए काम करना होगा!
आप सोचेंगे की ऐसे छोटे कदम एक बड़े प्रदेश को कैसे बदल सकते है मगर आप सोचिये एक छोटा कदम अगर बड़ी संख्या में लोग फॉलो करते है तो प्रदेश जरूर बदल सकता है !ये छोटे बदलाव देखने से यूपी के निवासियों के बीच गर्व और गरिमा की भावना पैदा होगी और कई चीजों में सुधार होगा।
एक साधारण उपाय ‘अगर एक शिक्षित व्यक्ति तीन अशिक्षित को शिक्षित करता है तो हम 100% साक्षरता प्राप्त कर सकते हैं लेकिन हम धर्म और जाति के आधार पर विभाजित हैं और आपस में लड़ रहे है’!

Aug 29, 2017 - Ankur Mishra, INDIA, Politics    No Comments

Am I Going to Die?

Just called my LIC Guy to keep my insurance money ready because life in India is not secure anymore, You can die anytime.
What is going on in my country? back to back tragedies back to back verdicts back to back deaths….
Seriously this is my India.
No! I think It is not.
We are the seventh-largest country by area, the second-most populous country (with over 1.2 billion people), and the most populous democracy in the world.
Still, these things are happening. I think the last fifteen days were the worst time of modern India. We had so many crucial things and saw so many things which should not happen in India.
Every Indian Knows, Even whole world knows-
  1. Gorakhpur Hospital Tragedy:
  2. Utkal Express
  3. Kaifiat Express
  4. Duronto Express
  5. Bihar Flood
  6. Mumbai Rains
  7. Baba Ram Raheem Case and deaths
  8. Many Rape Cases

…etc.

This list is very long.

maxresdefault

You can’t go to a government hospital.

Who do we blame for this? Government or college authorities? Due to this incident, it has become clear that no soul person is responsible for it. This is the result of the negligence of both our government and the college. If these people were somewhat active then today many children do not have to wash their hands from their lives.

Peoples dies in the terrorist attack, whose fault it is? Obviously terrorists. A building col lapses and many causualitiesoccurs, whose fault it is ?? Obviously engineers. Now, 290 innocent children died in hospital. Be anyone responsible for any deaths but what about that lives. Does taking responsibilities will give them their life back.

Terrorists infiltrate and kill innocent lives. Our government have crores of rupees to build Shiv Smarak but don’t have enough money to build a better defense system. This is just one example, there are many such. Why there is no proper checking whether the structure made can withstand the or longer time or not. And then this Gorakhpur tragedy. Some says it was due to lack of oxygen supply and the officials say we are probing the matter. Everyone teaches ” Prevention is better than cure” but what about taking it into practile.

If you are a girl going market or somewhere, you are not secure. Someone from this Indian society can kill you or rape you, and this is happening every day. These things are happening because we don’t have any toughttules and regulations for rapists.

If you are traveling by train, in next kilometers your train may leave the path or someone can burn your train or you can face some major accident or you can just be murdered. Indian railway department is just hanging in Air.

Be careful, Anything can happen anytime if are traveling in Indian Railways.

And this flood and rain are next level tragedy. We lost many people in Bihar, UP, and Asam. Now Mumbai is wearing this pain, Seriously What and why is happening?

I don’t think, I am safe in India anymore.

“मतलब यहां कुछ भी हो सकता है कभी भी, आप रात को घर से वॉक के लिए निकलते हो तो आपका क़त्ल हो जाता है, आपका रेप हो जाता है!  घूमने निकलते हो तो आपकी ट्रेन का एक्सीडेंट हो जाता है और आपकी जिंदगी की यात्रा समाप्त हो जाती है, कभी आप हिन्दू मुस्लिम दंगो का शिकार हो जाते हो तो कभी बाबा राम रहीम के अंधे भक्तो क बीच में मारे जाते हो! सीमा पर खड़ा जवान कभी भी शहीद हो जाता है, पुलि वाला भीड़ में मारा जाता है….

क्या सच में कल मै/ आप घर जिन्दा वापस आ पाएंगे? क्या भरोषा है आपको?”

Rape, Murder, Train Accident, Hospital Tragedies, riots….

Anything/ anyone can ask for your life.

Do You Feel Safe in India?

 

Aug 12, 2017 - Ankur Mishra, INDIA    No Comments

… क्या आपको सच में लगता है, हमारा देश आजाद है?

मेरा देश कहाँ जा रहा है, मेरा प्रदेश कहाँ जा रहा है, क्या हो रहा है यहाँ, और क्यों हो रहा है!

आखिर जिम्मेदार कौन है – मै, मेरे माता-पिता जिन्होंने मुझे जन्म दिया या फिर कोई और (सरकार या प्रशासन)!

“पहले बाबा से कहानियाँ सुनता था – की आजादी के पहले हमें ये परेशानी होती थी हमें वो परेशानी होती थी, अंग्रेज सरकार और प्रशासन हम पर बहुत बुरे जुल्म करता था, खाना, रहना और घूमना सब कुछ दुर्लभ था और साथ में वो ये भी कहते थे अब हम आजाद हो गए है जो हम लोगो ने सहन किया वो तुम्हे नहीं करना पडेग़ा, तुम बड़े होकर सब खुलकर कर सकते हो- देश आजाद है…”
यह सब वाक्या करीब 15 साल पहले का है जब मै 10 साल का था, उस समय छोटा था तो पता नहीं चला की आखिर देश में क्या चल रहा है, हम खुद को चला रहे है या सरकार हमे चलाती है, हमारे लिए कानून बनाती है बिना हमसे पूँछे, जितना चाहे जिस तरीके से चाहे पैसा वसूल करती है ! जब चाहे जिस तरीके से चाहे नया कानून लगा देती है, रोजाना आंतरिक दंगे हो रहे है, मंदिर मस्जिद की लड़ाई हो रही है, गरीब भूखा मर रहा है मगर हर छोटी से छोटी चीज में अट्ठारह पर्सेंट टैक्स दे रहा है, सरहद पर रोजाना जवान मर रहे है मगर नेता जी की कड़ी निंदा नहीं ख़त्म हो रही और जाने क्या क्या हो रहा है मेरे देश में जिसका बयान भी नहीं कर सकते !
बच्चियों, लड़कियों और औरतो के साथ बलात्कार हो रहे है और नेता जी शांत है उस पर कोई कड़ा कानून नहीं बनायेगे क्योंकि जानते है हो सकता है कल कहीं मै और मेरा बेटा ही न फस जायें! आखिर क्या हो रहा है यहाँ और कब तक होगा?
क्या एक और स्वतंत्रता चाहिये होगी हमें अपनों से ही और क्या पता उसके बाद भी सब कुछ सही हो जाये?
आज तो हद हो गयी अभी तक इस प्रशासन और सरकार का शिकार बड़े उम्र के लोग होते थे, मगर गोरखपुर की त्रासदी ने बच्चो को लील लिए !
ऐसे बच्चे जिन्हे ये भी नहीं पता की वो मरे क्यों है, उसके पीछे कारण क्या है उन्हें तो ऑक्सीजन का मतलब भी नहीं पता, इन सब मासूमो की मौत का जिम्मेदार कौन होगा ?
Ankur Mishra Blog
या फिर से इसे एक और हादसा कहकर सरकार आगे बढ़ जाएगी ?
मै कभी कभी सोचता की सरकार आखिर है ही क्यों?
बस इसलिए क्योकि लोकतंत्र में लिखा हुआ है, की देश में एक सरकार होनी चाहिए जो देश को संचालन कर सके?
या फिर सरकार इसलिए होती है की देश की जनता के लिए क्या सही है क्या गलत है यह सोच सके?
देश में गरीब भी है उनका भी ख्याल रखना है यह सोच सके?
देश की सुरक्षा के बारे में सोच सके?
मगर आज तो ऐसा कुछ भी नहीं है! तीन दिनों बाद हम देश का ७१वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे है,
अपने दिल से एक बार पूंछना क्या इन बच्चो की मौत के बाद, रोजाना होते बलात्कारों के बाद, सरहद पर मर रहे शहीदों के बाद, बढ़ती महंगाई के बाद ……
क्या आपको सच में लगता है मेरा देश आजाद है!
अगर आप इस आजादी से खुश हो तो इस देश का भविष्य बहुत अंधकार में है!

नितीश कुमार – अवसरवादी? मजबूत? या मजबूर?

नमस्कार नितीश जी,
मुबारक हो आप एक दिन के अंदर बिहार के नायक से महानायक और खलनायक बन गए, पहले मुख्यमंत्री थे – स्तीफा दिया और फिर से मुख्यमंत्री बन गए!
मै अब भी भ्रम में हूँ आपको मजबूत कहूं या मजबूर?
जो व्यक्ति मुख्यमंत्री होते हुये एक भ्र्स्ताचारी से स्तीफा नाही ले पाता वो प्रदेश क्या खाक चलायेगा, प्रदेश से भ्रष्टाचार क्या खाक भगायेगा !
अब कहाँ है वो संघी जो अरविन्द केजरीवाल के स्तीफा देने पर उसे भगोड़ा कह रहे थे? केजरीवाल ने तो अपने वादों और सिद्धांतो के लिए स्तीफा दिया था, तो क्या मै यहाँ ये समझू की अगर अरविन्द उस वक्त भाजपा का समर्थन लेकर सरकार बनाते तो संघियों के लिए भगोड़े नहीं होते?
नितीश जी ऐसी अवसरवादिता तो भारतीय राजनीती में किसी ने नहीं दिखाई होगी! मै इस बात से सहमत हूँ की लालू यादव और परिवार भ्रस्टाचार से भरा पड़ा है, मगर क्या ये बात समझने में आपको दो साल से ज्यादा का समय लगा? आप तो बिहार की सेवा बचपन से कर रहे हो और लालू परिवार की रग रग से वाकिफ हो, फिर भी आपने सरकार बनाई – वहाँ भी अवसरवादिता दिखाई आपने और सही वक्त देखकर पल्ला पलट लिया!
“मिट्टी में मिल जायेंगे पर भाजपा से नहीं मिलेंगे”
आपने ही कहा था न विधानसभा चुनाव के बाद, मगर अचानक से क्या हुआ?
क्या 2019 के दूरगामी स्वप्न देख रहे है आप?
आपकी इस हरकत से एक गण याद आता है:-
ना ना करते, प्यार तुम्हीं से कर बैठे
करना था इंकार मगर इक़रार तुम्हीं से कर बैठे
मेरी नजर में सबसेसबसे बुरा राजनेता लालू यादव था मगर उस लिस्ट में सबसेसबसे ऊपर अब आप हो, नितीश कुमार जी – मै आपको एक विकासवादी नेता के रूप में जनता था मगर आपकी इस हरकत ने आपको सबसे बड़ा अवसरवादी नेता बना दिया !
जिस पार्टी के खिलाफ आपने चुनाव लड़ा और जीता, उसी के साथ सरकार बनाना जनता के साथ सबसे बड़ा विश्वावसघात है! ऐसे ही खेल चलता रहा तो जनता का लोकतंत्र से विस्वास एक दिन पूरा उठ जायेगा!
बिहार में बहार है, नितीश कुमार है!
 
मै प्रार्थना करूँगा ईश्वर आपको अक्ल दे, सोचने समझने की झमता दे !
 
शुभकानायें
 
 
एक भारतीय
 

प्रधान सेवक जी, किसानो और जवानो की कितनीं और लाशें देखनी पड़ेगी ?

प्रधान सेवक जी,

आप ने जिस दिन देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, उस दिन लगा था कोई युवा देश की बागडोर संभाल रहा है, देश की दशा में कुछ परिवर्तन आएगा ! मगर जैसे जैसे आपका कार्यकाल बढ़ रहा है वैसे वैसे देश की दशा और बिगड़ रही है ! मेरी सोच से देश के विकास में दो लोगो का सबसे महत्वपूर्ण योगदान होता है – एक सीमा पर खड़े जवान का दूसरा खेत में खड़े किसान का, मगर आपने दोनों को नजरअंदाज किया हुआ है! किसानो और जवानो की लाशें रोजाना सामने आ जाती है, आखिर ऐसी क्या मजबूरी है आपकी? या फिर आप इसका समाधान निकालने में सक्षम नहीं है ?

मै उत्तर प्रदेश के एक किसान का बेटा  हूँ, जो सभी मौसम में खेतो में खड़ा रहता है, हम यहाँ ३० डिग्री तापमान के ऊपर रोने लगते है, वो ५० डिग्री में भी खेतो में खड़ा होता है, थोड़ी रात हो जाने पर हम डरने लगते है वो रात भर अकेला घने जंगल में सोता रहता है, जो अमीषा वक्त का पाबंध होता है, उसकी कोई चुनावी घोषणा नहीं होती वो अनाज उगाके दिखाता है अनगिनत तकलीफे सहता है फिर भी घर वालो से कभी शिकायत नहीं करता, वो कभी अकेले के लिए अन्न नहीं उगाता – अगर वो नहीं हो तो हमारा एक दिन जीना संभव नहीं है !

फिर भी उस किसान की आज ऐसी दशा, जब वो अपने हक के लिए लड़ रहा है, उसी पर गोलियां चलवाई जा रही है! यह कैसी सरकार है सर ? इन किसानो को आपसे बहुत आशाएँ थी मगर आपने उनके लिए कुछ करना तो दूर उनकी जिंदगी ही छीन ली ! कुछ समय पहले तक किसान परेशान होकर खुद – खुदख़ुशी कर रहे थे मगर अब आपने ही उनका गला दबाना शुरू कर दिया, और उसके बाद उसकी लाशो पर राजनीती खेली जा रही है! जिस किसान की लाश में आप राजनीती कर रहे हो, वही किसान कल तक कड़-कडाती धूप, थर-थराती सर्दी, गड-गड़ाती बरसात में बिना गमझे,
बिना छाता, बिना चप्पल, बिना कम्बल पैदल उस खेत में जाता था, जहाँ की दाल और अनाज से आपकी थाली में खाना सजता है ! हमारा मालिक था वो हमें रोटी मिलती थी उसकी वजह से, मगर कभी भी उसने जताया नहीं ! कभी कभी तो वो खुद भूखा सो जाता है, उस किसान के लिए हम आज राजनीती कर रहे है ! आपने और आपकी सरकार ने तो घोषणा कर दी उसकी मौत में कुछ चिल्लर !

जनाब पैसे से मत लगाओ उसकी कीमत, अन्नदाता था तुम्हरा, पैसे से नहीं चूका पाओगे उसका कर्ज !

प्रधान सेवक जी, क्या यही देश का भविष्य है? क्या यही योजनाये है किसानो के लिए आपकी?  अगर देश में किसान नहीं बचे, तो देश भी नहीं बचेगा ! अब भी क्या २०१९ के चुनाव की घोषणाओं का इंतजार करोगे सर? कुछ इनके बारे में भी सोच लीजिये !

दुआए मिलेंगे, खाना मिलेगा और आप और हम सब जिन्दा रह पायेंगे !

 

साभार 

देश का एक आम नागरिक 

एक किसान का बेटा

कपिल मिश्रा को एक खुला पत्र – अपनी खुद की बुद्धि से काम लीजिये !!

कपिल जी नमस्कार,

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के राजनीती में काफी हंगामा मचा रखा है ! देखकर अच्छा नहीं लग रहा, आखिर ऐसा क्या हो गया जिसके कारन आप सीधे घर वालो पर ही कीचड़ उछालने निकल पड़े ! आप हमेशा कहते हो – अरविन्द जी मेरे लिए बहुत सम्मानित है और साथ ही साथ उनकी इज्जत में कीचड़ उछाल रहे हो ! आम आदमी पार्टी केवल आपकी, अरविन्द जी की या शीर्ष पर बैठे चाँद नेताओ की नहीं है – पार्टी हजारो लाखो  कार्यकर्त्ता की है जिन्होंने लाठिया खायी है जो जेल गए है ! जिनमे से एक मै भी हूँ, आप हमेशा क्या बताए रहते हो की मै धरने पर बैठा, मैंने वह आंदोलन किया, क्या आपने अकेले आंदोलन किया था उस समय भी आपके साथ हजारो लाखो लोग थे !

तब आपके साथ लोग थे आज आपके पास उनमे से कोई भी नहीं है, आज आप अकेले हो ! ये सब देखकर आपको नहीं लगता की आपने कुछ न कुछ तो गलत किया है! आप लोगो से कहते हो मै कल टैंकर घोटाले का खुलासा करूँगा और आप अगले दिन सुबह आकर ऊल – जुलूल आरोप लगते हो ! क्या हुआ उन आरोपों का ? आप कोर्ट गए ? आप सीबीआई के पास गए ? कुछ नहीं हुआ तो क्या ये सारा ड्रामा पब्लिसिटी बटोरने के लिए था?

जब आपके आरोप आये तो कुछ पल के लिए मेरे पैरो टेल की जमीन फिसल गयी,  मगर काफी सोचा और जो आप को बिल्कुल पसंद नहीं करते मैंने उनके बयां सुने उनसे बात हुयी !उन्होंने यही कहा अरविन्द कुछ भी कर सकता है मगर ‘पैसे’किसी हालत में नहीं ले सकता ! विरोधियो के द्वारा कही गयी वो बात मेरे लिए शक्ति थी अरविन्द पर भरोसा रखने की , वो भी उस वक्त जब आपने अपने ही घर में आग लगा दी थी !

कपिल जी अभी वक्त कम है इतना ही लिख रहा हूँ, थोड़ा अपनी खुद  की बुद्धि से काम लीजिये ! घर में आग लगा दी है कही वही आग आपके खुद के घर तक न आ जाये !

पूरा पत्र आपको जल्दी ही मिलेगा !!

 

एक आम आदमी

अंकुर मिश्रा

Pages:1234567»