नितीश कुमार – अवसरवादी? मजबूत? या मजबूर?

नमस्कार नितीश जी,
मुबारक हो आप एक दिन के अंदर बिहार के नायक से महानायक और खलनायक बन गए, पहले मुख्यमंत्री थे – स्तीफा दिया और फिर से मुख्यमंत्री बन गए!
मै अब भी भ्रम में हूँ आपको मजबूत कहूं या मजबूर?
जो व्यक्ति मुख्यमंत्री होते हुये एक भ्र्स्ताचारी से स्तीफा नाही ले पाता वो प्रदेश क्या खाक चलायेगा, प्रदेश से भ्रष्टाचार क्या खाक भगायेगा !
अब कहाँ है वो संघी जो अरविन्द केजरीवाल के स्तीफा देने पर उसे भगोड़ा कह रहे थे? केजरीवाल ने तो अपने वादों और सिद्धांतो के लिए स्तीफा दिया था, तो क्या मै यहाँ ये समझू की अगर अरविन्द उस वक्त भाजपा का समर्थन लेकर सरकार बनाते तो संघियों के लिए भगोड़े नहीं होते?
नितीश जी ऐसी अवसरवादिता तो भारतीय राजनीती में किसी ने नहीं दिखाई होगी! मै इस बात से सहमत हूँ की लालू यादव और परिवार भ्रस्टाचार से भरा पड़ा है, मगर क्या ये बात समझने में आपको दो साल से ज्यादा का समय लगा? आप तो बिहार की सेवा बचपन से कर रहे हो और लालू परिवार की रग रग से वाकिफ हो, फिर भी आपने सरकार बनाई – वहाँ भी अवसरवादिता दिखाई आपने और सही वक्त देखकर पल्ला पलट लिया!
“मिट्टी में मिल जायेंगे पर भाजपा से नहीं मिलेंगे”
आपने ही कहा था न विधानसभा चुनाव के बाद, मगर अचानक से क्या हुआ?
क्या 2019 के दूरगामी स्वप्न देख रहे है आप?
आपकी इस हरकत से एक गण याद आता है:-
ना ना करते, प्यार तुम्हीं से कर बैठे
करना था इंकार मगर इक़रार तुम्हीं से कर बैठे
मेरी नजर में सबसेसबसे बुरा राजनेता लालू यादव था मगर उस लिस्ट में सबसेसबसे ऊपर अब आप हो, नितीश कुमार जी – मै आपको एक विकासवादी नेता के रूप में जनता था मगर आपकी इस हरकत ने आपको सबसे बड़ा अवसरवादी नेता बना दिया !
जिस पार्टी के खिलाफ आपने चुनाव लड़ा और जीता, उसी के साथ सरकार बनाना जनता के साथ सबसे बड़ा विश्वावसघात है! ऐसे ही खेल चलता रहा तो जनता का लोकतंत्र से विस्वास एक दिन पूरा उठ जायेगा!
बिहार में बहार है, नितीश कुमार है!
 
मै प्रार्थना करूँगा ईश्वर आपको अक्ल दे, सोचने समझने की झमता दे !
 
शुभकानायें
 
 
एक भारतीय
 

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