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Dec 14, 2017 - Jaun Elia    No Comments

जौन एलिया कभी भी किसी साहित्यिक गिरोह का हिस्सा नहीं थे – वह एक स्वतंत्र आत्मा थे, उनकी एक स्वतंत्र विचारधारा थी

जौन एलिया उत्तर प्रदेश में जन्मे एक ऐसे कवि है जो इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सुने और पढ़े जाते है ! भारत-पाक विभाजन के दौरान जौन एलिया पाकिस्तान के निवासी हो गए थे मगर हिन्दुस्तान से उनका और हिन्दुस्तानियों का उनसे प्यार कम नहीं हुआ ! उनकी कविताएं उनके क्रांतिकारी विचारों को प्रतिबिंबित करती हैं ! जॉन एलिया का जन्म 14 दिसंबर 1931 को अमरोहा, उत्तर प्रदेश में हुआ। यह अब के शायरों में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले शायरों में शुमार हैं। शायद, यानी,गुमान इनके प्रमुख संग्रह हैं इनकी मृत्यु 8 नवंबर 2004 में हुई। जौन सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं हिंदुस्तान व पूरे विश्व में अदब के साथ पढ़े और जाने जाते हैं।

जौन एलिया युवाओं के लिए भी एक और उद्देश्य की सेवा कर रहे हैं! उनकी कविता और उनके लिखने की स्वतंत्रता युवाओ को सोचने और लिखने पर विवस करती है, आज जब लिखने और बोलने के पहले सोचना पड़ता है, सोच एक कमरे तक सीमित रह गयी है ऐसी परिस्थिति में जौन एलिया की लेखनी युवाओ में प्रेरणा का काम करती है ! जौन एलिया ने कभी भी अपनी मनोदशा को नियंत्रित नहीं किया एक खुली विचारधारा के साथ उस समय लिखा जब भारत-पाक विवाद चरम सीमा पर था !
आज, हर ‘सफल’ व्यक्ति समृद्ध है, सफल कवि अमीर हैं, सफल गायक/ गायिका समृद्ध हैं, हर सफल पत्रकार समृद्ध हैं। मगर जौन एलिया शायद इस पैटर्न से बहुत दूर थे, उनके पदचिन्ह अलग थे ! आज के नए कवि उसी पैटर्न में दिख रहे है, उनकी अपनी शैली है उनके अपने विचार है अपनी विचारधारा है!
आज कविशाला भी एक ऐसी ही विचारधारा के लिए काम कर रहा है, जो कभी भी कवियों को वाधित नहीं करती किसी विशेष धारा को फॉलो करने के लिए, हर एक कवि स्वतन्त्र है अपने विचारो को अपनी धारा और लय में लिखने के लिए ! कोई भी धारा या विचारधारा किसी इंसान के द्वारा ही निजात की गयी है ! हो सकता है आज के युवा एक नयी विधा निजात कर ले, साहित्य और कविता में स्वतंत्रता ही किसी नए अविष्कार में सहायक होती है !
अभी हाल ही में जो प्यार, जौन एलिया को युवाओ से मिला है उससे यही प्रतीत होता है की शायद हमें जौन कुछ बताना चाहते है वो चाहते है हम अपनी कलम को समझे और उसका उपयोग करे! वो खुद कहते हैं:
हार आयी है कोई आस मशीन, शाम से है बहुत उदास मशीन 
ये रिश्तो का कारखाना है, एक मशीन और उसके पास मशीन 
एक पुर्ज़ा था वो भी टूट गया, अब रखा क्या है तेरे पास मशीन    
आज जौन एलिया की लोकप्रियता बढ़ रही है, उनकी कुछ प्रसिद्ध पंक्तियाँ जो उनके जीवन और उनकी पारखी नजर को दर्शाती है :
——
मैं जो हूँ ‘जौन-एलिया’ हूँ जनाब
इस का बेहद लिहाज़ कीजिएगा
——
अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर
कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
 
——
अब कि जब जानाना तुम को है सभी पर ए’तिबार
अब तुम्हें जानाना मुझ पर ए’तिबार आया तो क्या
——
अब तो उस के बारे में तुम जो चाहो वो कह डालो
वो अंगड़ाई मेरे कमरे तक तो बड़ी रूहानी थी
——
अपने सभी गिले बजा पर है यही कि दिलरुब
मेरा तिरा मोआ’मला इश्क़ के बस का था नहीं
 
 
जौन एलिया कभी भी किसी भी साहित्यिक गिरोह का हिस्सा नहीं थे! वह एक स्वतंत्र आत्मा थे एक स्वतंत्र विचारधारा थी !