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Dec 25, 2017 - Ankur Mishra, INDIA, Poetry, Politics    No Comments

कविता हो या राजनीती – अटल जी के व्यक्तित्व का हर रंग एक दूसरे से जुदा है

उनकी लेखन और बोलने के तरीके के सभी फैन है, तीखी बात को मीठा कैसे बनाना है और समाज को कैसे बताना है अगर यह किसी को सीखना है तो अटल बिहारी वाजपेयी जी को जरूर पढ़े, सुने और उनके बारे में जाने ! 1924 में जब अटल जी का जन्म हुआ था तब स्वाधीनता संग्राम अपने चरम पर था !  उसी माहौल में पले बढे अटल जी का स्वाभाव अत्यंत सरल है, वे मृदुभाषी होने के साथ साथ कुशल समाज सेवक भी रहे हैं!

जब 1957 में उन्होंने संसद भवन में प्रवेश किया तब किसी ने सोचा भी नहीं था की यही सथारण नेता देश का अभिनेता बनकर उभरेगा! उन्होंने लगातार सतत परिश्रम एवं निरंतरता के दम पर 7 बार लोक सभा सदस्य बनकर देश में एक रिकार्ड स्थापित किया, उन्होंने पहली बार देश को गैर कांग्रेसी सरकार दी ,संयुक्त राष्ट्र सघ में राष्ट्र भाषा हिंदी को उदीयमान किया, कारगिल जैसे विशाल युद्ध को शांति पूर्वक निपटाया, देश के दो बार प्रधानमंत्री बनकर देश को कुशल प्रधानमंत्री और  विकास दिया जो एतिहासिक है! अटल जी कूटनीति में पारंगत थे मगर साथ ही साथ एक महान कवि हृदय भी थे, कड़े फैसले कैसे लेने हैं, सबको साथ लेकर कैसे चलना है यह अटल जी बेहतर कोई नहीं जान सकता था! जरूरत पड़ने पर अपनी पार्टी की आलोचना कैसे और कहाँ करे … इत्यादि !
कवि हो या राजनीतिज्ञ, अटल जी के व्यक्तित्व का हर रंग एक दूसरे से जुदा है!
एक कवि और लेखक होने के नाते मै अटल जी का बहुत बड़ा फैन हूँ, उनकी कुछ पंक्तियाँ हमेशा कानो में आती रही है और सोचने पर बिवस करती रहती हैं :
 
 
मनाली मत जइयो, गोरी
राजा के राज में.
जइयो तो जइयो,
उड़िके मत जइयो,
अधर में लटकीहौ,
वायुदूत के जहाज़ में.
जइयो तो जइयो,
सन्देसा न पइयो,
टेलिफोन बिगड़े हैं,
मिर्धा महाराज में.
जइयो तो जइयो,
मशाल ले के जइयो,
बिजुरी भइ बैरिन
अंधेरिया रात में.
जइयो तो जइयो,
त्रिशूल बांध जइयो,
मिलेंगे ख़ालिस्तानी,
राजीव के राज में.
मनाली तो जइहो.
सुरग सुख पइहों.
दुख नीको लागे, मोहे
राजा के राज में.
 
– अटल बिहारी वाजपई 
 
—–
 
खून क्यों सफेद हो गया?
भेद में अभेद खो गया.
बंट गये शहीद, गीत कट गए,
कलेजे में कटार दड़ गई.
दूध में दरार पड़ गई.
खेतों में बारूदी गंध,
टूट गये नानक के छंद
सतलुज सहम उठी, व्यथित सी बितस्ता है.
वसंत से बहार झड़ गई
दूध में दरार पड़ गई.
अपनी ही छाया से बैर,
गले लगने लगे हैं ग़ैर,
ख़ुदकुशी का रास्ता, तुम्हें वतन का वास्ता.
बात बनाएं, बिगड़ गई.
दूध में दरार पड़ गई.
 
– अटल बिहारी वाजपई 
 
—–
 
क्षमा करो बापू! तुम हमको,
बचन भंग के हम अपराधी,
राजघाट को किया अपावन,
मंज़िल भूले, यात्रा आधी।
जयप्रकाश जी! रखो भरोसा,
टूटे सपनों को जोड़ेंगे।
चिताभस्म की चिंगारी से,
अन्धकार के गढ़ तोड़ेंगे।
– अटल बिहारी वाजपई 
 
—–
 
कौरव कौन
कौन पांडव,
टेढ़ा सवाल है|
दोनों ओर शकुनि
का फैला
कूटजाल है|
धर्मराज ने छोड़ी नहीं
जुए की लत है|
हर पंचायत में
पांचाली
अपमानित है|
बिना कृष्ण के
आज
महाभारत होना है,
कोई राजा बने,
रंक को तो रोना है|
 
– अटल बिहारी वाजपई 
 
ये अटल जी की कुछ कविताओं के अंश है जिसे कोई भी पढ़कर प्रफुल्लित हो उठेगा !
इन्होने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया!
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम कहते थे की ‘अटल जी आधुनिक भारतीय राजनीती की परिभाषा बन चुके है जिस दिन इस सूर्य का अस्त हुआ उस दिन भारतीय राजनीती अपठनीय हो जाएगी” उनका मुख्य हथियार शालीनता है जो आज के नेताओ से कोशो दूर है आज तो आरोप प्रत्यारोप ही राजनेताओ का मुख्य हथियार बन चुके है ! वो कड़वी से कड़वी बात अपनी शालीनता से मनवा लेते थे ! पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी भी उनकी इस शालीनता के कारण उनका सम्मान करती थी !
और अंत में भी सही समय पर राजनीत से विदा लेकर एक महान व्यक्तित्व का परिचय दिया है !
आज ऐसे ही प्रधानमंत्री, कुशल समाज सेवक, कुशल वक्ता और एक अच्छे कवि ने अपने 93 वर्ष पूर्ण कर लिए है आपको ज्ञात हो की 25 दिसंबर का दिन एक महान दिन माना जाता है क्योकि इसी दिन ईसा मसीह का अवतरण हुआ था और इसी दिन महान वैज्ञानिक आइन्स्टीन जी का जन्म हुआ था जो अपने आप में अपना एक अलग महत्त्व रखता है !
अगर मै कवि से हटकर एक राजनीतिक सोच  चलता हूँ, तो मुझे लगता है आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को अटल जी से काफी कुछ सीखने की जरूरत है !
–  भारतीज जनता पार्टी केंद्र की सत्ता में इन दोनों नेताओ की छवि को लेकर ही पहुंची लेकिन वाजपेयी जहां पार्टी में सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करते रहे वहीं मोदी ने आडवाणी, जोशी और जसवंत सिंह जैसे बुजुर्ग नेताओं को किनारे लगा दिया!
– अटल जी अपने विरोधियों पर राजनीतिक हमला करते वक्त एक तरह की शिष्ट भाषा का इस्तेमाल करते थे जबकि मोदी किसी भी स्तर तक चले जाते हैं!
– वाजपेई जी और मोदी दोनों ही नाटकीय वक्ता माने जाते हैं लेकिन वाजपेई के भाषणों में जहां और गंभीरता और आलंकारिक छटा होती थी, वहीं मोदी अपने बड़बोलेपन के लिए जाने जाते हैं!
– पीएम मोदी ने हमेशा हिन्दू हृदय सम्राट की छवि बनाई है, जबकि वाजपेई उदार हिंदुत्व की सोच रखते थे!
मेरे प्रभु!!!
मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना
गैरों को गले न लगा सकूँ
इतनी रुखाई कभी मत देना !
– अटल बिहारी वाजपई