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Nov 23, 2017 - Ankur Mishra, Pollution    No Comments

हमारा यह सफर जारी रहा तो जल्द ही हम प्रदूषण में विश्व विजयी हो जायेगे

पर्यावरण प्रदूषण अपने चरम पर है, मगर लोगो की जिंदगी इतनी तेज रफ़्तार से बढ़ रही है की किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है ! प्रकृति रोजाना चेतावनी देती है, कभी हवा के जरिये, तो कभी आसमान के जरिये, कभी जमीन के जरिये तो कभी पानी के जरिये, मगर दो-चार दिन की तक सोशल मीडिया में बात करके या फिर शांति से घर के अंदर रहके सब कुछ भूल जाते है ! लोग बिना गाड़ियों के चल नहीं सकते, बिना इलेक्ट्रिसिटी के रह नहीं सकते, बिना हवा के साँस नहीं ले सकते, बिना पानी के जीवन नहीं है ….

फिर भी इन सब चीजों को इंसान खुद ही ख़त्म करने में तुला है ! सैकड़ो पेड़ काट तो सकता है मगर रोजाना एक पेड़ लगा नहीं सकता, रोजाना न जरूरत होते हुए भी सैकड़ो लीटर पानी बर्बाद कर देता है, हर त्यौहार में हजारोके पढाके जला देता है…..

आखिर क्यों ?

क्या इंसान की खुद की जिंदगी उसकी नहीं है, जिसकी वजह से उसको इसकी कोई भी परवाह नहीं है ! अनेक प्रकार के प्रदूषण के चलते रोजाना सैकड़ो लोग अपनी जान गवाते है, बीमार पड़ते है , अस्पताल जाते है…
फिर भी प्रकृति के लिए कुछ नहीं करते, उसके साथ खिलवाड़ करने के अलावा !
चीन अभी प्रदूषण के मामले में सबसे आगे है मगर अगर हमारा प्रकृति के लिए गन्दगी फ़ैलाने का यह सफर जारी रहा तो जल्द ही हम प्रदूषण में विश्व विजयी हो जायेगे ! कभी कभी लोग इस प्रदूषण की वजह भरी जनसख्या को मानते है, मगर क्या यह सच है? क्या बढ़ी हुयी जनसँख्या ही एक कारण है या इंसान का रहन सहन प्रमुख कारण है !
भारत की किसी सरकार ने पर्यावरण प्रदूषण को कभी भी प्रमुख मुद्दा क्यों नहीं बनाया?
क्या यह काले धन वापसी, जी एस टी, नोटबंदी या किसी भी दूसरे मुद्दे से छोटा मुद्दा है पर्यावरण प्रदूषण? 
भारत की सरकारों की ढीली नीतियाँ ही आज के प्रदूषण का प्रमुख कारण भी है, जिस तरह से सरकार रातो रात पूरे देश में पुराने नोट बंद कर सकती है या दूसरे और कानून जबरन लगा सकती है क्या उसी प्रकार सबसे सबसे बड़ी समस्या के लिए कानून नहीं बनाये जाने चाहिए?
समस्या बहुत बड़ी है, इतनी बड़ी है की मनीष मुंद्रा और संजय मिश्रा को ‘कड़वी हवा’ जैसी फिल्म से लोगो को जगरूप करना पड़ रहा है! 
देश के हर तब्के के लोगो को आगे आकर सोचना पड़ेगा, समस्या हर घर की सरकार द्वारा चलाये जा रहे हर नियम को जो पर्यावरण प्रदूषण को रोकने में सहायक हो उसका पालन करना पड़ेगा !
कुछ पंक्तियाँ है मेरी एक कविता की –
मानते है प्रगति पथ पर हम बहुत आगे बढे हो,
बदलो से और ऊपर चाँद-तारो पर चढ़े हो !
जलधि अम्बर एक करके स्वर्ग धरती पर बनाए,
और मरुस्थल पर भी तुमने मृदु अम्बु के अंचल बहाए!
ब्रह्म का नितशोध करके ब्रह्म ज्ञानी तुम कहाए,
मौत के मुख से भी जिंदगी तुम वापस ले आए !
चाहते क्या कोकिला भी गीत अब गए नही,
क्या मधुर पुष्पों के उपवन है तुम्हे भाए नही!
नाज से मुक्ति की ऐसी एक दुनिया बनाओ,
शान्ति हो सदभाव हो विध्वंश के सभ नाश हो!!
शुरुआत एक आम इंसान अपने घर से कर सकता है,
  1. अगर आप इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग नहीं कर रहे तो, पंखा , बल्ब बंद करके रखे! ऐसी चीजों का प्रयोग न कर करे जिसका एक बार प्रयोग करने के बाद फेकना पड़े!
  2. जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके पेड़ लगाए, एक पेड़ लगाने में आपको आधा घंटा से ज्यादा का वक्त नहीं लगेगा !
  3. सोलर एनर्जी का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करे !
  4. धूम्रपान न करे या काम करे !
  5. ऐसे वाहनों का प्रयोग करे जिनसे प्रदूषण काम हो या न हो
  6. ऐसे प्रोडक्ट्स प्रयोग करे जिनमे, प्लास्टिक और कागज फेकना न पड़े !
  7. पड़ाके न जलाये, खुशियां जाहिर करने के और भी रस्ते है !
…. और बहुत सी छोटी छोटी चीजे है जिनकी हम बचपन से पढ़ते आ रहे है ! बस जरूरत है अमल करने की !