कपिल मिश्रा को एक खुला पत्र – अपनी खुद की बुद्धि से काम लीजिये !!

कपिल जी नमस्कार,

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के राजनीती में काफी हंगामा मचा रखा है ! देखकर अच्छा नहीं लग रहा, आखिर ऐसा क्या हो गया जिसके कारन आप सीधे घर वालो पर ही कीचड़ उछालने निकल पड़े ! आप हमेशा कहते हो – अरविन्द जी मेरे लिए बहुत सम्मानित है और साथ ही साथ उनकी इज्जत में कीचड़ उछाल रहे हो ! आम आदमी पार्टी केवल आपकी, अरविन्द जी की या शीर्ष पर बैठे चाँद नेताओ की नहीं है – पार्टी हजारो लाखो  कार्यकर्त्ता की है जिन्होंने लाठिया खायी है जो जेल गए है ! जिनमे से एक मै भी हूँ, आप हमेशा क्या बताए रहते हो की मै धरने पर बैठा, मैंने वह आंदोलन किया, क्या आपने अकेले आंदोलन किया था उस समय भी आपके साथ हजारो लाखो लोग थे !

तब आपके साथ लोग थे आज आपके पास उनमे से कोई भी नहीं है, आज आप अकेले हो ! ये सब देखकर आपको नहीं लगता की आपने कुछ न कुछ तो गलत किया है! आप लोगो से कहते हो मै कल टैंकर घोटाले का खुलासा करूँगा और आप अगले दिन सुबह आकर ऊल – जुलूल आरोप लगते हो ! क्या हुआ उन आरोपों का ? आप कोर्ट गए ? आप सीबीआई के पास गए ? कुछ नहीं हुआ तो क्या ये सारा ड्रामा पब्लिसिटी बटोरने के लिए था?

जब आपके आरोप आये तो कुछ पल के लिए मेरे पैरो टेल की जमीन फिसल गयी,  मगर काफी सोचा और जो आप को बिल्कुल पसंद नहीं करते मैंने उनके बयां सुने उनसे बात हुयी !उन्होंने यही कहा अरविन्द कुछ भी कर सकता है मगर ‘पैसे’किसी हालत में नहीं ले सकता ! विरोधियो के द्वारा कही गयी वो बात मेरे लिए शक्ति थी अरविन्द पर भरोसा रखने की , वो भी उस वक्त जब आपने अपने ही घर में आग लगा दी थी !

कपिल जी अभी वक्त कम है इतना ही लिख रहा हूँ, थोड़ा अपनी खुद  की बुद्धि से काम लीजिये ! घर में आग लगा दी है कही वही आग आपके खुद के घर तक न आ जाये !

पूरा पत्र आपको जल्दी ही मिलेगा !!

 

एक आम आदमी

अंकुर मिश्रा

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